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भारत की जनता जनार्दण किंऊ पड़ेशान है?

22 मार्च 2014, 3:41 am द्वारा news reporter प्रेषित   [ 22 मार्च 2014, 3:43 am अपडेट किया गया ]
जनता
भारत की जनता जनार्दण शायद अपनि समस्याओं से बेहद पड़ेशान है और वह पड़ेशानीओ की जड़ है देश की बर्तमान अधोपातित और भ्रष्ट अर्थ-राजनीति्क-सामाजिक ब्यबस्था।

कुछ बर्षों मे कई ऐसे कारण बने जिनकी बजह से जनता समस्याओं के भंबर मे फंस गई। बीते पांच सालो मे दुनिय़ा की उभारती हुई अर्थब्यबस्था के मुकाबले भारत की महंगाई मे सबसे ज्यादा उछाल दर्ज किया गया। कहीं देशमे राजनीतिक भ्रष्टाचार अपने चरम सीमा पर है।
सामाजिक न्याय जरूरतमंदो के लिए दुर की कौड़ी बन चुका है तो देश मे तेजी से बढ़ रहे युबाओ के लिए काँलेजों की कमी और गुणबत्तापूर्ण शिक्षा की समस्या लगातार बढ़ती हि जा रही है।

बाहरी ताकतों और आतंकी हमलों से निपटने के मोर्चे पर भी सरकार  असहाय ही नजर आ रही है। दुर्भाग्य तो यह है की धर्मनिरपेक्षता नेताओ के लिये महज वोट हथियाने का जरिया बनता जा रहा है।

वोट हथियाने का गन्दी राजनीत और सत्ता की लालच मे जात-पात के नाम से  देश को छोटे छोटे टुकड़ो मे वंटा जा रहा है। लोकसभा चुनाव से ठिक पहले समाज को कचोटने वाले ऎसे ही कुछ मुद्दो पर भारतीय जनता जनार्दण सायद पड़ेशान है।

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