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शंकराचार्य क्या कहीन

24 जून 2014, 8:41 am द्वारा news reporter प्रेषित   [ 24 जून 2014, 8:43 am अपडेट किया गया ]
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खबर है शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने साईं भक्तों पर फिर से हमला बोला है और कहा कि साईं भक्तों को गंगा में स्नान नहीं करना चाहिए और शादी की रस्म करना भी छोड़ दें। साथी ही शंकाराचार्य ने कहा कि साईं भक्तों को राम का नाम नहीं लेना चाहिए।

इससे पहले सोमवार को शंकराचार्य ने कहा था कि साईं पूजा हिंदू धर्म के खिलाफ है। एक टीवी चैनल पर शंकराचार्य ने कहा कि साईं भक्तों को भगवान राम की पूजा, गंगा में स्नान और हर-हर महादेव का जाप नहीं करना चाहिए।

खबर है शंकराचार्य के खिलाफ शिरडी में धार्मिक भावनाएं भड़काने का केस दर्ज हुआ है। हालांकि इसके बावजूद भी वे साईं पूजा के विरोध में दिए बयान पर अड़े रहे। इसको लेकर मंगलवार को शंकराचार्य के खिलाफ कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए।

 शंकराचार्य के आलोचक वर्ग कहतें है जब कोई धर्म समाज को जोड़ने के बज़ाय तोड़ने की दिशा में आगे बढ़ता या कार्य करता हुआ दिखलाई पड़ता है तो यह दिशाहीन धर्म पथभ्रष्ट कहलाता है। शंकराचार्य जैसे महत्वपूर्ण और गरिमामय पदपर आसीन व्यक्ति जब अनावश्यक रूप से इस तरह के बेतुके बयानों से जुड़ता है तो, वह अपने धर्म या समाज का भला करने के बजाय केवल उपहास और तिरस्कार का पात्र बनकर रह जाता है। राजनीतिक पार्टियाँ केवल अपने संकीर्ण स्वार्थों की पूर्ति के लिये प्रत्येक धर्माचार्यों का अपनी सुविधानुसार इस्तेमाल करती रहती हैं, इससे ज्यादा इनकी भूमिका , महत्व या उपयोगिता उनकी दृष्टि में कभी नही रहती थी और न होगी। कभी भारतीय राजनीति में ब्रह्मचारी जी, चंद्रास्वामी, शाही इमाम का भी वर्चस्व रहा, रामदेव जी को भी प्रोटोकाल की अवहेलना कर कॉंग्रेस का मंत्रिमण्डल समूह एयरपोर्ट पर रिसीव करने गया था, किन्तु परिणाम किसी के लिये भी अंततः सुखद नही रहा. इनको एक उपेक्षित और तिरस्कृत अपमानजनक जीवन ही तो मिला।
फ्टो: नवभारत टाइम्स

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