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वृक्षारोपण मांगलगीतों के साथ

9 अग॰ 2015, 8:50 am द्वारा news reporter प्रेषित   [ 9 अग॰ 2015, 8:52 am अपडेट किया गया ]
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मसूरी/देहरादून । पहाड़ की महिलाएं पर्यावरण और जंगलों की रक्षा के लिए एक बार फिर आगे आई हैं। ग्राम पंचायत भट्टा क्यारकुली के महिला मंगल दल ने इसी मनोकामना के साथ पौधरोपण की अपनी मुहिम शुरू कर दी है। शुक्रवार 25 जूलाई को महिलाओं ने भट्टा गांव में विभिन्न प्रजातियों के करीब तीन सौ पौधे रोपे। खास बात यह रही की महिलाओं ने पहाड़ी संस्कृति को मुहिम से जोड़ते हुए पौधरोपण के दौरान पहाड़ी मंगलगीत गाए और पर्यावरण सरंक्षण का संकल्प लिया।
महिला मंगल दल की अध्यक्ष मीना कोटाल ने कहा कि प्रदूषण से लगातार पर्यावरण का चक्र बदल रहा है। जिसके कारण प्राकृतिक आपदा जैसी स्थितियां पैदा हो रही हैं। बताया कि यदि नियमित रूप से पौधरोपण किया जाए तो ऐसी स्थितियों से निपटा जा सकता है। महिलाओं ने रोपे गए तीन सौ पौधों की देखरेख करने का भी निर्णय लिया। कहा कि पौधों को सूखने नहीं दिया जाएगा साथ ही भविष्य में भी पौधरोपण करेंगे। बताया कि प्राकृतिक जल स्रोतों को सूखने से बचाने के लिए जंगल जरूरी हैं।
कार्यक्रम में रुकमणी थापली, दयालसिंह रावत आदि ग्रामीण मौजूद थे।संवाद सूत्र, मसूरीरू पहाड़ की महिलाएं पर्यावरण और जंगलों की रक्षा के लिए एक बार फिर आगे आई हैं। ग्राम पंचायत भट्टा क्यारकुली के महिला मंगल दल ने इसी मनोकामना के साथ पौधरोपण की अपनी मुहिम शुरू कर दी है। 1शुक्रवार को महिलाओं ने भट्टा गांव में विभिन्न प्रजातियों के करीब तीन सौ पौधे रोपे। खास बात यह रही की महिलाओं ने पहाड़ी संस्कृति को मुहिम से जोड़ते हुए पौधरोपण के दौरान पहाड़ी मंगलगीत गाए और पर्यावरण सरंक्षण का संकल्प लिया।
महिला मंगल दल की अध्यक्ष मीना कोटाल ने कहा कि प्रदूषण से लगातार पर्यावरण का चक्र बदल रहा है। जिसके कारण प्राकृतिक आपदा जैसी स्थितियां पैदा हो रही हैं। बताया कि यदि नियमित रूप से पौधरोपण किया जाए तो ऐसी स्थितियों से निपटा जा सकता है। महिलाओं ने रोपे गए तीन सौ पौधों की देखरेख करने का भी निर्णय लिया। कहा कि पौधों को सूखने नहीं दिया जाएगा साथ ही भविष्य में भी पौधरोपण करेंगे। बताया कि प्राकृतिक जल स्रोतों को सूखने से बचाने के लिए जंगल जरूरी हैं। कार्यक्रम में रुकमणी थापली, दयालसिंह रावत आदि ग्रामीण मौजूद थे।

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