विशेष समाचार

अगरबत्ती जलाकर की ईवीएम की पूजा इलाहाबाद में

18 दिस॰ 2017, 5:51 am द्वारा news reporter प्रेषित   [ 18 दिस॰ 2017, 5:53 am अपडेट किया गया ]

EVM puja
खबर के अनुसार गुजरात में भाजपा फिर सत्‍ता हासिल करने की ओर अग्रसर है। गुजरात में अब तक 93 सीटों के नतीजे आए हैं। भाजपा ने 46, कांग्रेस ने 47 और अन्‍य ने 4 सीटें जीत ली हैं। शेष सीटों पर चुनाव परिणाम कुछ देर में घोषित कर दिए जाएंगे। वहीं अगर कुल सीटों की बात करें तो बीजेपी 99 कांग्रेस 80 और अन्य 3 सीटों पर आगे चल रहे हैं। 2012 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 115 सीटें मिली थीं वहीं कांग्रेस के खाते में 61 सीटें आई थीं। इस बार के नतीजों में बीजेपी को लगभग 15 सीटों का नुकसानम हुआ है तो वहीं कांग्रेस 20 सीटों के फायदे पर है। हिमाचल प्रदेश में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनना तय है। यहां की 68 सीटों में से 43 पर बीजेपी जीतती नजर आ रही है।

उल्लेखनीय़ है, दोनों राज्यों में मिली हार के बाद इलाहाबाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ईवीएम हैक होने की बात कहते हुए प्रदर्शन किया है। ईटीवी की खबर के मुताबिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बेहद अनूठे तरीके से ईवीएम मशीन पर फूल माला चढ़ाकर औऱ अगरबत्ती दिखा कर पूजा अर्चना की। प्रदर्शन कर रहे कांग्रेसियों के हाथ में प्लेकार्ड भी थे जिसपर लिखा था- हैक हुई EVM मइया तुम्हें बचाऊं कैसे। कुछ प्लेकार्ड्स पर ये भी लिखा था कि मोदी जी का जैक, EVM मइया हैक।


सोर्स : जनसत्ता

अलीपुरद्वार जिला बीजेपी में भयंकर टूट

25 सित॰ 2017, 5:18 am द्वारा news reporter प्रेषित   [ 25 सित॰ 2017, 6:04 am अपडेट किया गया ]

Alipurduar Bjp
पिछले कुछ महीनों से अलीपुरद्वार जिला बीजेपी मैं अंतर्दलीय झगड़े ज्यादा ही जोर ले लिया है। जिला सभापति पैसे लेकर खुल्लम खुल्ला गोरखालैंड समर्थन कर रहे हैं इस मुद्दे पे तीव्र विरोध करते हुए जिला सभापति को निलंबित करने कि मांग पर कई वरिष्ठ नेता, कर्मकरता एवं दलीय कर्मी सब मिलाकर कुल 1000 लोग अपने अपने पदों से पदत्याग कर दिए हैं। यह लोग यह भी बताते हैं कि बीजेपी सभापति तृणमूल कांग्रेस के जिला सभापति का इशारे पर चलते हैं। यहां तक की जिला बीजेपी सभापति जिला टीएमसी सभापति के इशारे पर विस्तारक कार्यक्रम ठीक से नहींं होने दिया। इस से आने वाली पंचायत चुनाव में इस जिले में बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ेगा।

पिछले तीन महीनों से जिले में यह बात लेकर बहुत सरगर्मी चल रही है। बांग्ला, हिंदी ,अंग्रेजी दैनिकों में रोज इस विषय पर कुछ ना कुछ खबर प्रकाशित हो रहे हैं। इसके अलावा बहुत सारा ऑनलाइन पोर्टल में भी खबर आ रहे हैं। Facebook, Twitter एवं अन्य सोशल मीडिया पर मैं बीजेपी सभापति के खिलाफ आए दिन कुछ न कुछ लिखे जा रहे हैं। इससे जिले की जनमानस पर बीजेपी के खिलाफ प्रचार गंभीर रुप से असर कर रहा हैं। बीजेपी सभापति के कुछ नेपालियों को खुश करने की और तराई-डुवार्स के समतल में गोरखालैंड समर्थन की प्रक्रिया से जिला के अन्याय संप्रदाय जैसे कि आदिवासी, बंगाली, बिहारी, मुसलमान एवं राजवंशी संप्रदाय बीजेपी से खफा हो गए हैं।

कहां जा रहा है की जिला बीजेपी सभापति को गोरखालैंड समर्थन करने के विषय पर RSS की प्रांत प्रचारक, जिला प्रचारक एवं विभाग प्रचारक के समर्थन मिला हुआ है। नाम प्रकाश करने में अनिच्छुक  जिला के कुछ पुराने एवं वरिष्ठ  बीजेपी नेता बताएं हैं की जल्द ही जिला बीजेपी सभापति को अपसारित नहीं करने से जिला में बीजेपी की नाम और निशान मिट जाएगा।

बीजेपी के राज्य नेतृत्य या केन्द्रीय़ नेतृत्य आलिपुरदुय़ार जिला के तरफ ठिक से ध्यान नहीं देने के कारण झगड़ा बढ़ते ही जा रहा है, और लोग दल छोड़ कर अलग हो रहें है।

अलीपुरद्वार जिला BJP के नेताओं कर्मियों के अंदर सोशल मीडिया, WhatsApp पर जिला बीजेपी सभापति के खिलाफ किस तरह के बातें आदान प्रदान किया जा रहा है उसकी एक उदाहरण नीचे दिया जा रहा है।

"" पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों को अप्रासंगिक बनाने के लिए बहुत सारे तत्व बीजेपी के अंदर में ही सक्रिय है। जैसे बंगाल के अलीपुरद्वार जिला बीजेपी के सभापति तराई डुआरस में खुल्लम-खुल्ला गोरखालैंड कि दलाली कर रहे है, इससे स्थानीय जनता मे सिर्फ कुछ नेपालियों को छोड़कर बाकी सभी जाति बीजेपी के खिलाफ खड़े हो गए हैं।

जनता के यह रूख देखकर जिला BJP के कई प्रवीण नेता सभापति के गोरखालैंड समर्थन के विरोध मे संवाद माध्यम में बयान देकर पदत्याग कर चुके हैं। संवाद मध्यम में प्रकाशित हुए हैं कि जनता के खिलाफ इस काम में स्थानीय RSS के कार्यकर्ताओं भी शामिल है।

BJP सर्व भारतीय सभापति श्री अमित शाह जी हाल में ही कहे हैं की देश से जातिवाद बहुत दूर तक खत्म हो गए हैं, किंतु उन्हीं के दल में एक जिला सभापति खुल्लम खुल्ला जातिवादी काम कर रहे हैं और इलाका के जनता संत्रस्त है, इस संदर्भ में शाह जी को कुछ करना चाहिए कि नहीं?""


आरएसएस का जेहादी सांप्रदायिक हिंसा पर वक्तव्य

26 अक्तू॰ 2016, 8:58 pm द्वारा news reporter प्रेषित   [ 26 अक्तू॰ 2016, 9:08 pm अपडेट किया गया ]

RSS-ABKM-16
राष्ट्रीय
स्वयंसेवक संघ गत कुछ दिनों में पं बंगाल, तमि लनाडु एवं कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों में अतिवादी जेहादी तत्वों द्वारा की गई क्रूर सांप्रदायिक हिंसा और प्रस्थापित सत्ता केन्द्रों की निष्क्रियता की कठोर निंदा करता है और ऐसी हिंसा फ़ैलाने वालों के विरुद्ध त्वरित कार्यवाही तथा अतिवादी तत्वों के प्रति सतर्क रहने की माँग करता है|


      गत विधानसभा चुनावों के बाद पं बंगाल में, हिन्दुओं के विरुद्ध सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में भयावह वृद्धि हुई है जिनमें अब तक अनेक मृत्यु एवं बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं| अनेक ग्रामों में, हिन्दुओं की सम्पत्ति को नष्ट किये जाने, महिलाओं के उत्पीड़न, मंदिरों तथा मूर्तियों को भ्रष्ट करने की घटनाओं आदि के परिणामस्वरूप हिन्दू समाज इन क्षेत्रों से पलायन करने को विवश हो रहा है| ऐसी ही एक घिनौनी घटना में, 10 अक्तूबर को नदिया जिले के हंसकाली थाना अंतर्गत दक्षिण गांजापारा क्षेत्र में एक दलित नाबालिग बालिका मऊ रजक पर उसके घर में ही हमला करके उसकी हत्या कर दी गई| गत दिनों दुर्गापूजा के समय हिन्दुओं को पंडाल खड़े करने से रोका गया और एक दर्जन से अधिक घटनाओं में दुर्गा पूजा विसर्जन यात्राओं पर हमले भी हुए| शासन तंत्र  ऐसी घटनाओं में मूक दर्शक बन कर प्राथमिकी भी दर्ज नहीं कर रहा है| कोलकाता उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा दुर्गा विसर्जन पर समय की अव्यवहारिक पाबन्दी लगाने के सरासर पक्षपातपूर्ण व्यवहार कीअल्पसंख्यक तुष्टीकरणकहते हुए कठोर शब्दों में निंदा की है|

      तमिलनाडु, केरल एवं कर्नाटक सहित दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में जेहादी तत्वों द्वारा हिंसात्मक गतिविधियों में वृद्धि होती दिखाई दे रही है, जिनमें हिन्दू, विशेष रूप से विविध राष्ट्रवादी संगठनों में कार्यरत स्वयंसेवकों पर हिंसक आक्रमण हुए हैं|

गत दो मास में, तमिलनाडु राज्य में चेन्नई, कोयम्बटूर, मदुरै एवं डिंडीगुल आदि स्थानों पर हिंसात्मक घटनाओं में वृद्धि होती दिखाई दे रही है, जिसमें रा. स्व. संघ, विहिप, भाजपा एवं हिन्दू मुन्नानी के अनेक कार्यकर्ताओं पर आक्रमण हुए हैं| शासन-तंत्र द्वारा जानबूझकर की गई अनदेखी से इन अतिवादी तत्वों के दुस्साहस में वृद्धि हुई है, जिसके कारण इन में से कुछ स्थानों पर संघ कार्यकर्ताओं की हत्या, करोड़ों रुपयों की सम्पत्ति का विनाश एवं हिन्दू महिलाओं पर अत्याचार हुए हैं| अम्बुर में महिला पुलिस बल के विरुद्ध हिंसा इन शक्तियों के बढ़ते प्रभुत्व को दर्शाती है, जिसे नियंत्रित करने में शासन भी असमर्थ हो रहा है| एक सांप्रदायिक संगठन के प्रमुख नेता द्वारा दी गईसीधी कार्यवाहीकी धमकी भयावह भविष्य की चेतावनी है| राज्य प्रशासन द्वारा ऐसे तत्वों के विरुद्ध कार्रवाई करने की अनिच्छा एवं उनके दबाव में आकर राष्ट्रवादी शक्तियों का उत्पीड़न अकल्पनीय है|

इसी मास कर्नाटक में एक संघ स्वयंसेवक की व्यस्त सड़क पर दिनदहाड़े हत्या कर दी गई| गत कुछ दिनों में कर्नाटक में बंगलूरू के अलावा मुडबिदरी, कोडागु एवं मैसूर में जेहादी तत्वों द्वारा चार से भी अधिक हिन्दू कार्यकर्ताओं की हत्याएँ हुई हैं|

केरल एवं तेलंगाना सहित विभिन्न राज्यों में गत दिनों में हुई गिरफ्तारियों से यह स्पष्ट होता है की उपरोक्त घटनाएँ पृथक स्थानीय घटनाएँ नहीं है अपितु विभिन्न राज्यों के अतिवादी तत्वों की परस्पर साठ गाठ की और संकेत करती हैं, जिनका संबंध IS जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों से भी है|


      रा. स्व. संघ संबंधित राज्य सरकारों से आग्रहपूर्वक माँग करता है कि ऐसे तत्वों की अविलम्ब और निष्पक्ष जाँच कर अपराधियों को दण्डित करें एवं समाज में शांति एवं सद्भाव के लिए सदा सतर्क रहें|

विश्व शांति के लिए भारत का शक्तिशाली राष्ट्र बनना आवश्यक-सुहासराव

17 अक्तू॰ 2016, 7:46 am द्वारा news reporter प्रेषित   [ 17 अक्तू॰ 2016, 7:48 am अपडेट किया गया ]

RSS JAIPUR
जयपुर, 11 अक्टूबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सेवा प्रमुख सुहासराव हिरेमठ ने कहा कि विश्व शांति के लिए भारत का शक्तिशाली राष्ट्र बनना आवश्यक है। जब तक भारत शक्तिशाली नहीं बनेगा दुनिया के किसी भी देश में चलने वाला आतंकवाद समाप्त नहीं होगा इसलिए समाज को संगठित करते हुए राष्ट्र को वैभव सम्पन्न बनाना हमारा कर्तव्य है। श्री सुहासराव हिरेमठ मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जयपुर विभाग के विजयादशमी उत्सव में उपस्थित स्वयंससेवकों एवं नागरिकों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान से ज्यादा चीन से खतरा है। महत्वाकांक्षी और विस्तारवादी नीति पोषक चीन ने तिब्बत पर अधिकार कर लिया है। अब उसकी भारत पर नजर है। सीमाओं पर हो रहे आक्रमणों की रक्षा तो सेना कर रही है लेकिन देश में हो रहे आर्थिक आक्रमण से समाज को संघर्ष करना होगा। विदेशी आक्रमणों का सामना 'स्व' के प्रकटीकरण से ही हो सकता है। उन्होंने स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का आव्हन किया।उन्होंने कहा कि जीवन में स्व का जागरण करना हर देशभक्त नागरिक का कर्तव्य है ।

विजयादशमी आसुरी प्रवृतियों पर विजय का दिन

उन्होंने यह भी कहा कि विजयादशमी विजय का विश्वास जागृत कर आसुरी प्रवृतियों को ध्वस्त करने वाला दिन है। विजय के लिए शक्ति आवश्यक है। यह सामर्थ्य की उपासना का संदेश देने वाला त्यौहार है। सामर्थ्य केवल शस्त्रों में नहीं होता उसके लिए मनोबल और प्रबल इच्छा शक्ति की जरूरत होती है।

सेना व नेतृत्व का अभिनंदन

उन्होंने कहा कि पिछले दिनों जम्मू- कश्मीर के उरी में सेना के शिविर पर आतंकी हमला हुआ। इससे समाज में निराशा और आक्रोश का वातावरण बन गया था। लेकिन हमारी सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक के माध्यम से पाक अधिकृत कश्मीर में जाकर आतंकी शिविरों को ध्वस्त कर दिया। यह तब संभव हुआ जब जागृत समाज ने समर्थ और मजबूत नेतृत्व को चुना इस आनन्द के अवसर पर सेना व नेतृत्व का अभिनंदन है।

 

संगठित राष्ट्र बनाने का लें संकल्प

अखिल भारतीय सेवा प्रमुख ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की शक्ति संगठित समाज पर निर्भर करती है। जापान और इजराइल इसके उदाहरण है। प्रतिकुलताओं के बाद भी अपने राष्ट्रीय भाव और संगठित शक्ति के कारण दोनों ही देशों ने पराक्रम हासिल किया है। इसलिए शक्ति सम्पन्न संगठित राष्ट्र बनाने के लिए हमें संकल्प लेना होगा।

श्री गुरूगोविंद सिंह का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनका 350 वां जयंती वर्ष है। गुरू गोविंद सिंह ने जाति, भाषा, पंथ, प्रांत आदि से उपर उठकर राष्ट्रहित के लिए समाज को संगठित करने का काम किया। धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने पूरे परिवार को  बलिदान कर दिया।

समरसता समस्त समाज का काम

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि समरसता का संदेश विचारों के साथ- साथ आचरण से देना होगा। छुआछूत और भेद- भाव को समाप्त करने के लिए हिंदू समाज को हृदय से जागृत होना होगा। रामानुजाचार्य की जयंती की इस वर्ष सहस्त्राब्दी है। उन्होंने जाति, पंथ के भेदभावों को मिटाते हुए, समाज के सभी वर्गों के लिये ज्ञान और भक्ति के द्वार खोले। उन्होंने कहा कि जाति, श्रेष्ठता और हीनता के आधार पर किसी को अपमानित और प्रताडित करना अपने समाज के लिए लज्जाजनक कलंक है। सामाजिक समरसता लाना संपूर्ण समाज का काम है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में समुचे राजस्थान में मंदिर, पानी और दाहसंस्कार स्थल के आधार पर होने वाले भेदभाव के अध्ययन के लिए सर्वेक्षण कर समरसता लाने के प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि देशभक्ति, प्रमाणिकता और समाज संगठन की गुणवत्ता निर्माण करने का साधन संघ की शाखा है। हम व्यक्ति निर्माण करेंगे, आने वाले दस वर्षों में सारा विश्व भारत माता की जय करेगा।

अजमेरी गेट पर अद्भुद्द संगम

इससे पहले विजय दशमी उत्सव पर महाराज कॉलेज मैदान पर स्वयंसेवकों का एकत्रिकरण हुआ। स्वयंसेवकों ने घोष, दण्डयोग, नियुद्ध और सूर्यनमस्कार का प्रदर्शन किया। शस्त्र पूजन हुआ। इसके बाद दो पथ संचलन निकाले गए। पहला पथसंचलन- महाराज कॉलेज के उत्तर पूर्वी द्वार, अजायब घर, मोत डूंगरी रोड़, बापू बजार, चौड़ा रास्ता, छोटी चौपड़, किशनपोल बाजार होता हुआ और दूसरा संचलन महाराजा कॉलेज के दक्षिण पश्चिम द्वार से अशोक मार्ग, एमआई रोड़, संसारचन्द्र रोड़, दरबार स्कूल, पांचबत्ती होते हुए दोनों संचलनों का अजमेरी गेट पर पूर्व निर्धारित समय पर दोपहर 12.13 बजे संगम हुआ। इसके बाद संचलन पुनः महाराज कॉलेज पहुंचकर सम्पन्न हुआ। संचलन का मार्ग में जगह- जगह हिन्दू समाज ने स्वागत किया

संस्कृत मे कुछ ध्येय़ वाक्य समूह

15 सित॰ 2016, 8:43 am द्वारा chittasen biswas प्रेषित   [ 15 सित॰ 2016, 8:48 am अपडेट किया गया ]

  1. अबतक लेख
    इंडोनेशिया
    , नेपाल,श्रीलंका ने भी ईसे अपनाया है

 

  1. विभिन्न संस्थाओं के संस्कृत ध्येय वाक्य ===

 

  1. आर्य समाज-कृण्वन्तो विश्वमार्यम

 

  1. आर्य वीर दल-अस्माकं वीरा उत्तरे भवन्तु

 

  1. भारत सरकार-सत्यमेव जयते

 

  1. लोक सभा-धर्मचक्र प्रवर्तनाय

 

  1. उच्चतम न्यायालय-यतो धर्मस्ततो जयः

 

  1. आल इंडिया रेडियो- बहुजनहिताय बहुजनसुखाय

 

  1. दूरदर्शन-सत्यं शिवम् सुन्दरम्

 

  1. गोवा राज्य-सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्

 

  1. भारतीय जीवन बीमा निगम-योगक्षेमं वहाम्यहम्

 

  1. डाक तार विभाग -अहर्निशं सेवामहे

 

  1. श्रम मंत्रालय -श्रम एव जयते

 

  1. भारतीय सांख्यिकी संस्थान -भिन्नेष्वेकस्यदर्शनम्

 

  1. थल सेना -सेवा अस्माकं धर्मः

 

  1. वायु सेना -नभःस्पृशं दीप्तम्

 

  1. जल सेना -शं नो वरुणः

 

  1. मुंबई पुलिस -सद्रक्षणाय खलनिग्रहणाय

 

  1. हिंदी अकादमी -अहम् राष्ट्री संगमनी वसूनाम

 

  1. भारतीय राष्ट्रीय विज्ञानं अकादमी -हव्याभिर्भगः सवितुर्वरेण्यं

 

  1. भारतीय प्रशासनिक सेवा अकादमी -योगः कर्मसु कौशलं

 

  1. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-ज्ञान-विज्ञानंविमुक्तये

 

  1. नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन -गुरुः गुरुतामो धामः

 

  1. गुरुकुल काङ्गडी विश्वविद्यालय-ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युमपाघ्नत

 

  1. इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय- ज्योतिर्व्रणीत तमसो विजानन

 

  1. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय-विद्ययाऽमृतमश्नुते

 

  1. आन्ध्र विश्वविद्यालय -तेजस्विनावधीतमस्तु

 

  1. बंगाल अभियांत्रिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय,शिवपुर -उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान् निबोधत

 

  1. गुजरात राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय -॥आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः

 

  1. संपूणानंद संस्कृत विश्वविद्यालय -श्रुतं मे गोपय

 

  1. श्री वैंकटेश्वर विश्वविद्यालय-ज्ञानं सम्यग् वेक्षणम्

 

  1. कालीकट विश्वविद्यालय -निर्मय कर्मणा श्री

 

  1. दिल्ली विश्वविद्यालय -निष्ठा धृति: सत्यम्

 

  1. केरल विश्वविद्यालय -कर्मणि व्यज्यते प्रज्ञा

 

  1. राजस्थान विश्वविद्यालय -धर्मो विश्वस्य जगतः प्रतिष्ठा

 

  1. पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय न्यायिक विज्ञानविश्वविद्यालय-युक्तिहीने विचारे तु धर्महानि: प्रजायते

 

  1. वनस्थली विद्यापीठ -सा विद्या या विमुक्तये

 

  1. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्(एन॰सी॰ई॰आर॰टी)-विद्ययाऽमृतमश्नुते

 

  1. केन्द्रीय विद्यालय -तत् त्वं पूषन् अपावृणु

 

  1. केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड -असतो मा सद् गमय

 

  1. प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, त्रिवेन्द्रम-कर्म ज्यायो हि अकर्मण:

 

  1. देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर-धियो यो नः प्रचोदयात्

 

  1. गोविंद बल्लभ पंत अभियांत्रिकी महाविद्यालय,पौड़ी-तमसो मा ज्योतिर्गमय

 

  1. मदन मोहन मालवीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय,गोरखपुर -योगः कर्मसु कौशलम्

 

  1. भारतीय प्रशासनिक कर्मचारी महाविद्यालय,हैदराबाद-संगच्छध्वं संवदध्वम्

 

  1. इंडिया विश्वविद्यालय का राष्ट्रीय विधिविद्यालय -धर्मो रक्षति रक्षितः

 

  1. संत स्टीफन महाविद्यालय, दिल्ली -सत्यमेव विजयते नानृतम्

 

  1. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान -शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्

 

  1. विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान,नागपुर -योग: कर्मसु कौशलम्

 

  1. मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान,इलाहाबाद -सिद्धिर्भवति कर्मजा

 

  1. बिरला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान,पिलानी -ज्ञानं परमं बलम्

 

  1. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर -योगः कर्मसु कौशलम्

 

  1. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई -ज्ञानं परमं ध्येयम्

 

  1. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर -तमसो मा ज्योतिर्गमय

 

  1. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई -सिद्धिर्भवति कर्मजा

 

  1. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की -श्रमं विना किमपि साध्यम्

 

  1. भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद -विद्या विनियोगाद्विकास:

 

  1. भारतीय प्रबंधन संस्थान बंगलौर -तेजस्वि नावधीतमस्तु

 

  1. भारतीय प्रबंधन संस्थान कोझीकोड -योगः कर्मसु कौशलम्

 

  1. सेना एम कोर -कर्मह हि धर्मह

 

  1. सेना राजपूताना राजफल -वीर भोग्या वसुन्धरा

 

  1. सेना मेडिकल कोर -सर्वे संतु निरामया

 

  1. सेना शिक्षा कोर -विदैव बलम्

 

  1. सेना एयर डिफेन्स -आकाशेय शत्रुन जहि

 

  1. सेना ग्रेनेडियर रेजिमेन्ट -सर्वदा शक्तिशालिं

 

  1. सेना राजपूत बटालियन -सर्वत्र विजये

 

  1. सेना डोगरा रेजिमेन्ट -कर्तव्यम अन्वात्मा

 

  1. सेना गढवाल रायफल -युद्धया कृत निश्चया

 

  1. सेना कुमायू रेजिमेन्ट -पराक्रमो विजयते

 

  1. सेना महार रेजिमेन्ट -यश सिद्धि

 

  1. सेना जम्मू काश्मीर रायफल -प्रस्थ रणवीरता

 

  1. सेना कश्मीर लाइट इंफैन्ट्री-बलिदानं वीर लक्षयं

 

  1. सेना इंजीनियर रेजिमेन्ट -सर्वत्र

 

  1. भारतीय तट रक्षक -व्याम रक्षामह

 

  1. सैन्य विद्यालय -युद्धं प्र्गायय

 

  1. सैन्य अनुसंधान केंद्र -बालस्य मूलं विज्ञानम

 

  1. नेपाल सरकार -जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी

 

  1. इंडोनेशिया जलसेना -जलेष्वेव जयामहे

 

  1. असेह राज्य (इंडोनेशिया) -पञ्चचित

 

  1. कोलंबो विश्वविद्यालय (श्रीलंका) -बुद्धि: सर्वत्र भ्राजते

 

  1. मोराटुवा विश्वविद्यालय (श्रीलंका) -विद्यैव सर्वधनम्

 

  1. पेरादेनिया विश्वविद्यालय (श्रीलंका) -सर्वस्य लोचनं शास्त्रम्

 

 

  1. संस्कृत ही भारत का मूल है, भारत का विकास इसीसे संभव है

 

मर्यादा, विज्ञान और पुरातन ज्ञान का समन्वय बने विकास का आधार

19 जून 2016, 7:19 am द्वारा news reporter प्रेषित   [ 19 जून 2016, 7:24 am अपडेट किया गया ]

प्रकृति की मर्यादा, विज्ञान और पुरातन ज्ञान का समन्वय बनाकर चलना केदारनाथ यात्रियों की हुतात्माओं को सच्ची श्रद्धांजलि होगी : डॉ. मोहन भागवत जी
Uttarakhand
17 जून,नई दिल्ली (इंविसंके)। उत्तराखंड के केदारनाथ में 2013 में आई प्राकृतिक आपदा की तीसरी बरसी पर मावलंकर सभागार में हुतात्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जिन कारणों से इतने सारे श्रद्धालु उस आपदा में मारे गए उन कारणों पर विचार कर उनसे सीख लेने की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि सदियों से हिमालय की गोद में हमारा समाज फलता-फूलता रहा है. पहले भी वहां प्राकृतिक आपदाएं आती रही हैं, परन्तु मन को उद्वेलित करने लायक कोई प्रसंग किसी प्राकृतिक आपदा में इससे पूर्व नहीं मिलता है।

ऐसी भौगोलिक स्थिति होने पर भी इतने वर्षों तक वहां लगातार समाज का जीवन चलता रहा, ऐसी कौन सी विधा हमने अपनाई जिसके कारण ऐसा हम कर सके। हिमालय का भूगोल तो पहले से वही है, नया पर्वत है, बढ़ रहा है, इसलिए वहां मिट्टी खिसकती है। एक टकराहट से हिमालय उत्पन्न हुआ है इसलिए प्लेट टैक्टोनिक की सब तरह की सम्भावनाएं भी वहां हैं। यह सारी बातें पहले से हैं और पहले से कुछ न कुछ तो ऐसा होता ही होगा। लगातार ऐसी बातें होती होने के बाद भी वहां पर मनुष्यों की बस्ती रही, फलीं-फूलीं और वो हमारी यात्रा का स्थान बन गया। हमारी तपस्याओं का स्थान बन गया, हमारी देव भूमि बन गया। तो हमारे पूर्वजों ने यह सारी बातें कैसे साधी. इसके लिए हमारे प्राचीन ग्रंध, पुराण और लोक श्रुति- जन श्रुतियों, परम्पराओं में प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर रहना बताया गया है, जिसका पालन हम सदियों से करते रहे थे. हमको यह ध्यान रखना चाहिए कि जहां जो विकास करना है उसके लिए वहां के जनमानस में परम्पराएं क्या हैं, जन श्रुतियां क्या हैं, उसका महत्व क्या है, विकास नीति में इसका भी हिसाब होना चाहिए। परीक्षा पर खरी उतरने वाली अपनी पारंपरिक बातों को विकास नीति में शामिल करना कुछ गलत नहीं है।

Uttarakhand002
सरसंघचालक जी ने कहा कि विकास की हमारी परम्परागत दृष्टि सम्पूर्ण सृष्टि के चैतन्य को मानती है। इसलिए हम सृष्टी के कण-कण को आपस में सम्बन्धित मानते हैं। इसलिए नदियों की स्वच्छता हमारे यहां कभी सरकारी नीति का विषय नहीं रहा, बल्कि स्थानीय स्तर पर यहाँ समाज तथा व्यक्तियों ने स्वयं अपने लिए नदियों को स्वच्छ रखने के नियम तय कर रखे थे। हमारी जो विकास की अवधारणा की दृष्टि है वह परस्पर सम्बन्धों का विचार करती है इसलिए उसमें हर बात की मर्यादा है। मनुष्य का विकास होना चाहिए लेकिन हमें अमर्यादित नहीं होना है। प्रकृति के प्रति हमने अपनी मर्यादा को लांघा तो मनुष्य के अस्तित्व को खतरा उत्पन्न होता है, यह वैश्विक सच है. क्षमता है इसलिए निर्माण करना यह निर्माण करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं है। क्षमता को विवेक की मर्यादा भी होनी चाहिए। विकास, पर्यावरण, विज्ञान और नीति के सारे झगड़े की जड़ ही इसमें है कि सबको मर्यादा में चलना है। विज्ञान की भी मर्यादा है, अध्यात्म की भी मर्यादा है। दोनों धर्म के पूरक होने चाहिए। यह मर्यादा का विवेक नीतियों के साथ ही हमारे-आपके आचरण में भी होना चाहिए। उचित नीतियों के द्वारा, आने वाले संकटों की कल्पना करते हुए आने वाले संकटों को प्रतिबन्धित कर सकें, ऐसी व्यवस्थाएं बिल्कुल ठीक बात है। परन्तु किसी भी संकट का सामना करना है तो मनुष्य की जीवट और मनुष्यों का मनुष्यों के प्रति कर्तव्य बोध जो आत्मीयता से उत्पन्न होता है, उसे पैदा करना आवश्यक है.

समाज को स्वार्थ प्रवृत करने वाला काम कभी नहीं होना चाहिए। मनुष्य को सेवा परायण, परोपकार प्रवण बनाने वाली, संस्कार देने वाली सब नीतियां होनी चाहिए। उत्तराखण्ड की त्रासदी का स्मरण करने के बाद अपने सामने जो बातें खड़ी होती हैं, उन सबका निदान इन बातों में है। मर्यादाओं को जानकर इन नीतियों का निर्माण होना चाहिए। परम्परा से आए हुए ज्ञान की समीक्षा, विश्लेषण करके, उसमें जो सिद्ध है उसको स्वीकार करना चाहिए। आधुनिक ज्ञान और पुराने ज्ञान की परीक्षा के बाद स्वीकृति और अस्वीकृति होनी चाहिए। मर्यादा का आचरण सब जगह होना चाहिए। मुख्य बात है कि अगर हम सब लोग एक दूसरे के सुख दुख की संवेदना के साथ तन्मय हैं तो ऐसा कोई संकट नहीं है जो प्रकृतिक हो या मानव निर्मित हो, ऐसा कोई संकट नहीं है जो हम लोगों को नामो हरम कर सकता है, हम लोगों को समाप्त कर सकता है। मुम्बई में विस्फोट का समय, लोग तुरन्त वहां से भागे नहीं लोग सहायता करने स्थल पर पहुंच गए और अस्पतालों में खून देने के लिए पहुंच गए। हम को विचार करना चाहिए कि हमारे समाज का यह स्वभाव कैसे बना। क्यों यहां लोग अपने परिवार के सदस्यों की हानि को न देखते हुए उनकी सुरक्षितता निष्चित कर तुरन्त बाकी लोगों के इलाज में सुरक्षा में लग जाते हैं। संघ के तो संस्कार हैं ही, लेकिन संघ के यह संस्कार भारत में नए नहीं हैं. संघ केवल अपनी परंपरा में आत्मीयता और संबंधों का जो संस्कार है जो हमको विरासत में मिला है उसको आदमी के हृदय में और बड़ा करने के सिवाय और कुछ नहीं करता। हम सब लोग इसको जानें और इसको करने में लग जाएं तो हमको ऐसे कारणों से बार-बार श्रद्धान्जलि सभा का आयोजन नहीं करना पड़ेगा।

हम मर्यादा, विज्ञान और पुरातन ज्ञान इनके साथ समन्वय साध कर चलें. मनुष्यों के सम्बन्धों का ध्यान रखकर अपना आचरण स्वार्थ परख न करते हुए उसको सेवा परायण बनाएं। हमारे उपनिषदों में जो आदेश है कि त्यागपूर्वक जियो, उसका अपने जीवन मे आचरण करो. हम सब सामान्य लोगों के लिए उस सबक को सीखना, उसके अनुसार चलना उस त्रासदी में हमसे विदा हुए हमारे समाज के आत्मजनों को सच्ची श्रद्धान्जलि होगी। उसका संकल्प मन में लेकर आप सब लोग यहां से जाएं। 

श्री मुरली मनोहर जोशी ने चिंता प्रकट कर कहा कि जिन कारणों से उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा आई उन कारणों को ठीक करने में  कितना समय और लगेगा. भारत अगर हमारी माता है तो हिमालय हमारा पिता है, जो उत्तरी ध्रुव से आने वाली बर्फीली हवाओं से हमें बचाता है. हिमालय बचने की ओर नहीं अपितु नष्ट होने की ओर बढ़ रहा है. इसको बचाने के लिए आधुनिक परिप्रेक्ष में क्या किया जाए इस पर विचार कर कदम उठाने की आवश्यकता है. हिमालय का प्रबंधन मैदानी क्षेत्रों की तरह नहीं किया जा सकता क्योंकि उसकी अपनी विशेष परिस्थितिकी है. भारी मशीनों, बड़ी-बड़ी सड़कों का बोझ हिमालय नहीं सह सकता. तीर्थ यात्रा के लिए अस्थाई निर्माण तथा सीमा की सुरक्षा के लिए आवश्यक सड़कें ही बनानी चाहिए. चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर बड़े-बड़े बांध बनाने तथा उसके जल प्रवाह को बदलने के प्रयास को उन्होंने कहा कि यह विश्व के लिए संकट बन सकता है.

केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि उत्तराखंड समर वेकेशन के लिए हिल स्टेशन नहीं है बल्कि एक धार्मिक स्थान है, यह ध्यान में रखकर वहां नीति व नियम बनाए जाएं.

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व हरिद्वार से संसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया कि केदारनाथ की त्रासदी सदी की सबसे बड़ी त्रासदी थी, अभी तक वहां लापता हुए सभी तीर्थयात्रियों का पता नहीं चला है. ऐसी त्रासदी दुबारा न आए इसके लिए उन्होंने हिमालय के लिए अलग से मंत्रालय बनाने के मांग की.

केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि 150 करोड़ रुपये की सहायता से हिमालय पर स्टडी होगी. हिमालय के पारिस्थितिकी तंत्र को समझकर रोजगार और पर्यटन को देखते हुए नीति बनेगी. इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर सख्ती से नियमों का पालन करवाना होगा. हिमालय को बचाने के लिए हम सभी को अपने ‘ग्रीड’ के बजाए ‘नीड’ पर चलना होगा.

पूर्व थल सेनाध्यक्ष तथा केंद्रीय मंत्री जनरल वी.के. सिंह ने कहा यह श्रद्धांजलि दिवस हम सबके लिए स्वयंसेवकों से सीख लेने का दिन है कि ऐसे समय में क्या करना चाहिए, कैसे सहयोग किया जाए.

 

दंडी स्वामी श्री जीतेन्द्र स्वामी ने बताया कि मनुष्य प्रकृति से ऊपर नहीं है. हमें पर्यटन और तीर्थांटन में अंतर करना होगा. तीर्थांटन को पर्यटन के रूप में देखने का नतीजा दैवीय आपदा के रूप में केदारनाथ, पशुपतिनाथ और महाकालेश्वर में देखने को मिला.

इस आपदा के भुक्तभोगी बिहार से सांसद श्री अश्वनी चौबे जो परिवार सहित केदारनाथ में मौत के मुँह से बचकर आए उन्होंने बताया कि ऐसी प्राकृतिक आपदा में क्या होना चाहिए, इस पर विचार होना चाहिए. सरकार की ओर से वहां कोइ व्यवस्था नहीं थी. लाखों श्रद्धालुओं की ईश्वर में श्रद्धा तब टूट जाती है जब ऐसे समय में कोइ देखनहारा नहीं होता. बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने विद्या भारती के विद्याययों में शरण दे कर उनके जैसे सैकड़ों तीर्थयात्रियों को बचाया.

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व केन्द्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने की। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह कृष्ण गोपाल, विदेश राज्य मंत्री जनरल वी के सिंह, वन एव पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के निदेशक श्री अनिल कुमार गुप्ता, कर्नल अशोक गिन्नी आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन केदारनाथ त्रासदी में अपने परिवार के आठ सदस्य गंवाने वाले और स्वयं काल के मुख से सुरक्षित बाहर आने वाले भाजपा सांसद एवं बिहार सरकार में पूर्व मंत्री अश्विनी चौबे के अखिल भारतीय उत्तराखंड त्रासदी मंच द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्री चौबे की उत्तराखंड की त्रासदी पर लिखी पुस्तक ‘त्रेहन’ का विमोचन भी किया गया. कार्यक्रम के आरम्भ में एक वृत्तचित्र के माध्यम से प्राकृतिक आपदा से ग्रस्त उत्तराखंड सुदूरवर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा कार्यों को प्रदर्शित किया गया.


गृहिणी शिविर समापन

14 जून 2016, 8:47 pm द्वारा news reporter प्रेषित   [ 14 जून 2016, 8:49 pm अपडेट किया गया ]

Sevika Samiti
राष्ट्र सेविका समिति, हरियाणा प्रांत का आर्य गर्ल्स पब्लिक स्कूल पानीपत में चल रहे "गृहिणी शिविर" का आज समापन हुआ । 15 जिलो से आई हुई 67 बहनों ने इस तीन दिवसीय शिविर में व्ययाम योग, प्राणायाम, दंड , योगचाप, नियुद्ध का प्रशिक्षण लिया। समापन की पूर्व संध्या पर दिल्ली से अखिल भारतीय अधिकारी माननीय आशा शर्मा व माननीय निर्मल गुप्ता जी की विशेष उपस्थिति रही।

माननीय आशा दीदी ने गृहिणी  व कार्यकर्ताओं को वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर (संस्थापिका- राष्ट्र सेविका समिति) का जीवन दर्शन व कार्यकर्ता की प्रवास योजना पर मार्गदर्शन किया। प्रशिक्षणार्थियों ने अपने अनुभवों को सांझा किया।वह अपने क्षेत्र में जाकर ऐसा ही कार्य करने का विश्वास  दिलवाया । सभी सेविकाओं को दीक्षांत समारोह में वंदनीय प्रमिला ताई जी मेढ़े( पूर्व संचालिका- राष्ट्र सेविका समिति) का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।

वे नागपुर से आकर इस शिविर में पूर्ण समय रही। उन्होंने बताया की वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर ने महात्मा गांधी के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भी भाग लिया। प्रमिला ताई जी ने बताया कि यहां से जो भी गुण लेकर जा रहे हैं वह सब में प्रसाद की तरह बांटे। हमें ईश्वर ने विशेष प्रयोजन से भारत देश में भेजा है, जो पुण्य भूमि है अतः हम लोकहित का भाव अपने मन में जगाए। संपूर्ण विश्व को बंधु माने हम निरंतर तन की, मन की व राष्ट्र की स्वच्छता में लगे रहे। उन्होंने बताया कि निस्वार्थ समाज सेवा के भाव का संकल्प लेकर अपने स्थान पर जाएं।


सामूहिक चर्चा - वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण

11 जून 2016, 9:55 am द्वारा news reporter प्रेषित   [ 11 जून 2016, 9:58 am अपडेट किया गया ]

Tree-Plantation
भारतीय संस्कृति और भारतीय जीवन व्यवस्था में पर्यावरण संरक्षण निहित है ।


          10 जून- पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण विषय पर विश्व संवाद केंद्र उदयपुर पर आयोजित समूह चर्चा में समाज के प्रबुद्धजन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए, समाज द्वारा हो रहा प्राकृतिक संसाधनों के शोषण पर चिंता व्यक्त की। अधिक से अधिक पौधो को लगा उसे पूर्ण वृक्ष बनने तक उसकी साल संभाल करने का आवाहन किया। चिपको आंदोलन जैसा ही राजस्थान में खेजलडी के पेड़ो को बचाने के लिए अमृता देवी के संरक्षण में जो आंदोलन चला था उसे भी याद किया गया, इसी घटना के उदाहरण से प्रेरितअपना संस्थानके द्वारा पेड़ लगाये जाने के अभियान को सराहा गया।
         भारतीय मूल संस्कृति के हर कार्य में पर्यावरण संरक्षण का भाव है और कालांतर में भोगवाद एवं विलासिता के चलते हमारी व्यवस्थाएं खण्डित हो गयी। पुराने किलो एवं महलो को देखके लगता है किस तरह, भारतीय निर्माण तकनीकी एक उन्नत तकनीकी थी जो पयार्वरण को ध्यान में रखती थी। हमारे वास्तु शास्त्र में भी यही सब बाते निहित है।

          सम्पूर्ण विश्व जहा प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है। हम अनेक तरह के पेड़-पौधे लगाकर कुछ हद तक निजात पा सकते है। वैज्ञानिक प्रयोगों से भी सिद्ध हो चुका है पीपल, बरगद जैसे वृक्ष छाया के अलावा हवा को भी शुद्ध कर पर्यावरण सन्तुलन मे विशेष भूमिका निभाते हैं । ऐसे में वृक्षा रोपण कर हम आने वाली पीढ़ी के लिये पर्यावरण को संरक्षित कर सकते है।

          शुद्ध जल आज विश्व की बहुत बड़ी समस्या है, पृथ्वी पर 70% जल होने का बाद भी पेयजल मात्र 1% है। ऐसे में जल का संरक्षण बहुत जरूरी है। वक्ताओं ने विषय बोलते हुए मेहमानो को लौटे व गिलास से पानी पीने पिलाने के महत्व को बताया। आज यदि घर में 5 मेहमान आते है तो घरवाले एक ट्रे में 5 गिलास पानी लेकर आते है। पांचो मेहमान मुह लगाकर पानी पीते है और आधा गिलास पानी छोड़ देते है। मेहमानों के जाने के बाद गिलासों में बचा शुद्ध पेयजल को व्यर्थ ही बहा दिया जाता है और जूठे गिलासों को धोने में और तीन गिलास पानी व्यर्थ कर दिया जाता है। दूसरी और यदि मेहमानो के समक्ष हम लौटे में पानी और गिलास लेकर जाएंगे तो, मेहमान उतना ही पानी भरने को कहेगा जितना उसे चाहिए ऐसे में आप ही गणित लगा लीजिये आप कितना पानी भारतीय व्यवस्थाओ के कारण बचा पायेंगे ।

                                                 - राहुल राठौड़

कृषि मानचित्रावलि का लोकार्पण

3 जून 2016, 9:18 am द्वारा news reporter प्रेषित   [ 3 जून 2016, 9:20 am अपडेट किया गया ]

भैय्याजी जोशी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माननीय सरकार्यवाह श्री भैय्याजी जोशी ने जून 1, 2016 को सायं 5.00 बजे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, जनपथ, दिल्ली में मध्यप्रदेश की कृषि मानचित्रावलि का लोकार्पण किया। इस अवसर पर भारत के माननीय कृषि मंत्री, श्री राधामोहन सिंह, माननीय सांसद श्री मुरली मनोहर जोशी, भारतीय किसान संघ के संगठन मंत्री श्री दिनेश कुलकर्णी और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय  कला केंद्र के अध्यक्ष श्री रामबहादुर राय उपस्थित थे। मानचित्रावलि के संपादक और समाजनीति समीक्षण केंद्र के निदेशक श्री जे.के. बजाज ने मानचित्रावलि की विषय-वस्तु प्रस्तुत की।

समाजनीति समीक्षण केंद्र एवं मध्यप्रदेश विज्ञान एवं तकनीकी परिषद् के संयुक्त प्रयास  से बनी इस  मानचित्रावलि में मध्यप्रदेश की कृषि के समस्त पक्षों का विस्तृत एवं सचित्र वर्णन हुआ है। मध्यप्रदेश में पिछले डेढ़ दशक में कृषि में हुए अभूतपूर्व विकास का प्रामाणिक चित्रण भी इस मानचित्रावलि में हो गया है। कृषि में हुए इस विकास के कारण मध्यप्रदेश के सकल उत्पाद में अब कृषि का भाग देश भर में सबसे अधिक है और कृषि-उत्पादन में वृद्धि में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बन गया है। मध्यप्रदेश में पिछले डेढ़ दशक में एक नयी हरित क्रांति ही हुई है।
इस कृषि मानचित्रावलि के अतिरिक्त इस समारोह में दतिया एवं टीकमगढ़ जिलों की संसाधन मानचित्रावलियों का लोकार्पण भी किया गया।

नारद जयंती : पत्रकारों को किया गया सम्मानित

22 मई 2016, 2:00 am द्वारा news reporter प्रेषित   [ 22 मई 2016, 2:02 am अपडेट किया गया ]

Arun-Jately-Narad-Utsav
नई दिल्ली, 20 मई, 2016. इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केन्द्र के तत्वावधान में आज आदि पत्रकार देवर्षि नारद की जयंती के शुभ अवसर पर प्रतिष्ठित नारद पत्रकार सम्मान समारोह आयोजित किया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अरुण जेटली एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र के संघचालक डॉ. बजरंगलाल गुप्त ने वर्ष 2015-16 में पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए आठ पत्रकारों को सम्मानित किया. इनमें वरिष्ठ पत्रकार श्री श्याम खोसला (लाइफ टाइम एचीवमेंट नारद सम्मान), श्री मनमोहन शर्मा (उत्कृष्ट पत्रकार नारद सम्मान) और डॉ. शंकर शरण (उत्कृष्ट स्तंभकार नारद सम्मान) सम्मिलित थे.


इस अवसर पर श्री अरुण जेटली ने चिंता जताई कि आजकल कुछ स्थानीय सरकारें अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए सरकारी विज्ञापन फण्ड का दुरूपयोग कर रही हैं, जिससे पत्रकारिता की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है. श्री जेटली ने कहा कि सोशल मीडिया ने आज मीडिया का इतना लोकतंत्रीकरण कर दिया है कि उस पर किसी भी प्रकार से अंकुश लगाना संभव नहीं रह गया है. उन्होंने साथ ही कहा कि अब यह जिम्मेदारी पत्रकारों और समाज की है कि वो इसका सही उद्देश्य के लिए प्रयोग करें. श्री जेटली ने लाइफ टाइम एचीवमेंट नारद सम्मान पाने वाले वरिष्ठ पत्रकार श्री श्याम खोसला के पत्रकारिता में योगदान की भूरी-भूरी प्रसंशा की और उनकी दीर्घायु की  कामना की. श्री जेतली ने उत्कृष्ट स्तंभकार के लिए नारद सम्मान से सम्मानित श्री मनमोहन शर्मा के योगदान की भी सराहना की और अन्य सम्मानित पत्रकारों का अभिनन्दन किया.

डॉ. बजरंगलाल गुप्त ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में नारद जी का जिस तरह से चरित्र-चित्रण हुआ है उससे उनकी छवि चुगलखोर और विदूषक की बन गई है, यह बहुत दुखदाई है. आज आवश्यकता है कि नारद का वास्तवित चरित्र समाज के सामने आये. डॉ. गुप्त ने कहा कि पत्रकारों का प्रेरणा स्रोत देवर्षि नारद होने चाहिये क्योंकि वह तीनों लोकों में वास्तविक समाचार तीव्र गति से पहुंचाकर समाज को सही दिशा देने का कार्य करते थे. नारद द्वारा सदेशों के प्रसार में कोई निजी हित अथवा किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं रहता था. वह सभी के लिए निष्पक्ष पत्रकारिता करते थे.
डॉ. गुप्त ने कहा कि लोगों को परिष्कृत करने का भी दायित्व पत्रकारों का ही होता है. लोकतंत्र को सफल बनाने में पत्रकारों का योगदान सर्वोपरि है. लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. लोकतंत्र की मजबूती के लिए पत्रकारों का तथ्यात्मक और निष्पक्ष होना बहुत जरूरी है. इस देश में मुद्दों के आधार पर पत्रकारिता को आगे बढ़ाने पर विचार विमर्श की आवश्यकता है. आज पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ा संकट आर्थिक दबाव है, इससे उबरने के लिए पत्रकारों को देवर्षि नारद के चरित्र से प्रेरणा लेनी चाहिये और उनके विचारों पर अमल करने की जरूरत है, तभी वर्तमान पत्रकारिता स्वच्छ, स्वतंत्र एवं निडर हो सकेगी.

कार्यक्रम के आरम्भ में पत्रकारों को शाल, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह एवं पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया. लाइफ़टाइम अचीवमेंट नारद सम्मान से सम्मानित श्री श्याम खोसला को एक लाख रूपए, उत्कृष्ट पत्रकारिता नारद सम्मान से  अलंकृत श्री मनमोहन शर्मा को 51 हजार रुपये एवं अन्य सम्मानित पत्रकारों को 11-11 हजार रूपये की राशि प्रदान की गई. श्रेष्ठ छायांकन के लिए उत्कृष्ट छायाकार नारद सम्मान स्व. श्री रवि कन्नौजिया को मरणोपरांत प्रदान किया गया. इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष श्री अशोक सचदेवा की तरफ से उनके परिवार को 21 हजार की अतिरिक्त राशि भी प्रदान की गई.

श्री श्याम खोसला, श्री मनमोहन शर्मा और डॉ. शंकर शरण के साथ ही श्री आशीष कुमार ‘अंशु’ (उत्कृष्ट ग्रामीण पत्रकारिता नारद सम्मान), श्री सय्यद सुहैल (उत्कृष्ट न्यूजरूम सहयोग), श्री प्रफुल्ल कुमार (उत्कृष्ट डिजीटल मीडिया नारद सम्मान) और श्री अभिरंजन कुमार (उत्कृष्ट सोशल मीडिया नारद सम्मान) को भी नारद सम्मान दिया गया. कार्यक्रम के समापन के अवसर पर इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के सचिव श्री वागीश ईसर ने सभी अतिथियों का धन्यवाद कर कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया.

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