डूबते फेसबुक को बचाया था भारत के मंदिरों से प्रेरणा लेकर: झुकरबर्ग

30 सित॰ 2015, 8:23 am द्वारा news reporter प्रेषित   [ 30 सित॰ 2015, 8:27 am अपडेट किया गया ]
मार्क झुकरबर्ग की इस अनुभूती परे ढोंगी धर्मनिरपेक्षतावादियों से प्रश्‍न करो की क्या अब वे मार्क जकरबर्ग को भी अंधविश्‍वासी कहेंगे ? राहुल गांधी ने कहा था की, मंदिर जानेवाले लडकीयों को छेडते हैं, तो अब वे क्या कहेंगे ? आमीर खान ने अपने चलचित्र ‘पीकेे में मंदिर जाने वालों की आलोचना की थी उन्हें इस पर क्या कहना है ?
modi-Zuker
September 29, 2015,सैन होजे – फेसबुक के संस्थापक मार्क झुकरबर्ग ने रविवार को इस बात का खुलासा किया कि फेसबुक के बुरे वक्त में उन्होंने भारत के एक मंदिर की यात्रा की थी।
झुकरबर्ग ने कहा कि वह भारत को ज्ञान का मंदिर मानते हैं जहां से उन्होंने फेसबुक को फिर से संगठित करने की प्रेरणा ली। उन्होंने कहा कि १० साल पहले उनकी कंपनी कठिन दौर से गुजर रही थी और बिकने की कगार पर पहुंच गई थी। तब उन्हें भारत आकर ही प्रेरणा मिली थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फेसबुक हेडक्वॉर्टर में बातचीत की मेजबानी करते हुए झुकरबर्ग ने कहा, ‘निजी तौर पर भारत को लेकर मैं कई वजहों से उत्साहित हूं।’ उन्होंने १० साल पहले के अपने एक महीने लंबे भारत दौरे के जिक्र करते हुए कहा, ‘फेसबुक के इतिहास में भारत बहुत महत्वपूर्ण है।’
झुकरबर्ग ने कहा कि फेसबुक कठिन दौरे से गुजर रहा था और बिकने के कगार पर पहुंच गया था तब उनके ‘गुरु’ और ऐपल के पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स ने कहा कि, भारत में एक मंदिर का दौरा करो। मार्क ने कहा, ‘इसलिए मैंने करीब एक महीने के लिए भारत का दौरा किया।’ उनके मुताबिक भारत की यात्रा के बाद उनके भीतर फेसबुक को अरबों की कंपनी के रूप में तब्दील करने का भरोसा फिर से पैदा हुआ।
उन्होंने कहा, ‘विचार यह है कि कुछ करने से पहले आपको मंदिर जाना चाहिए।’ झुकरबर्ग ने कहा, ‘भारत में बहुत आशावाद है। आप भारत पहुंचते हैं, आशा लिए मंदिर में जाते हैं और देखिए कि आप कहां पहुंच जाते हैं। आपका अनुभव आशा दिखाता है। भारत के बारे में कुछ विशेष है।’ फेसबुक के प्रमुख ने कहा कि वह इस बारे में जानने के इच्छुक थे कि मोदी ने लोगों से सीधे जुड़ने के लिए कैसे सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में अब भी एक अरब लोग इंटरनेट से दूर हैं। मोदी ने कहा, ‘मैं आशा करता हूं कि आप दुनिया भर में एक अरब लोगों की आवाज बनेंगे।’

स्त्रोत : नवभारत टाइम्स

Comments