अभी तक हमने देश का ये रूप देखा है : लेखक : संजय कुमार ठाकुर

Post date: Oct 12, 2012 3:00:11 PM

लूट किया देशको, लूट लिया देशको,

इन देश के गद्दारों ने,लूट लिया देशको,

कभी राष्ट्रीय खेल के नाम पर तो कभी दुर संचार के नाम पर

इन देश के बेइमानों ने,लूट लिया देशको।

तव भी हम सोये थे,अव भी हम सोये है,

इन्ही के भरोसे क्या हम छोड़ दे देश को?

लूट किया देशको, जी लूट किया देशको,

इन देश के गद्दारों ने,लूट किया देशको।

कहते फ़िरे है,वो हिन्दु हम मुसलिम है,

लड़ाना ही उसका सिर्फ़ एक मकशद है,

धर्म के नाम पर ये लूट लिया देशको,

इन देश के गद्दारों ने,लूट किया देशको।

अव तो जागो,अव तो उठो,हे,देश के नौजवानों,

सिखा दो सवक इन गद्दारों को,

मिटा दो नाम इस देश से,चुकाकर

कर्ज इस देश का,बचा लो इस देश को,

इन देश के गद्दारों से,बचा लो इस देश को।